ना-ख़ुदा डर नहीं दरिया की रवानी का हमें हर तलातुम से निकलने का हुनर जानते हैं
Related Sher
उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
151 likes
मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
140 likes
तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
130 likes
दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
139 likes
तूफ़ानों से आँख मिलाओ सैलाबों पे वार करो मल्लाहों का चक्कर छोड़ो तैर के दरिया पार करो
Rahat Indori
144 likes
More from Saqlain Mushtaque
कुछ तो मुश्ताक़ शब-ए-हिज्र में राहत होगी जाते-जाते कोई तस्वीर पुरानी दे दे
Saqlain Mushtaque
1 likes
हिज्र मुश्किल से भी मुश्किल न कहीं हो जाए तुम शब-ए-वस्ल कोई ऐसी नवाज़िश न करो
Saqlain Mushtaque
1 likes
ग़म-ए-हिज्र से मैं हूँ आशना मुझे आरज़ू-ए-विसाल है ये इलाज और ये मुआलिजा मेरे दर्द कि तो दवा नहीं
Saqlain Mushtaque
1 likes
न था कोई तसव्वुर में तो जीने की न थी ख़्वाहिश मगर अब ज़िंदगी तुझ सेे जुदा होने से डरता हूँ
Saqlain Mushtaque
2 likes
वो आँखें ख़ूब-सूरत हैं वो चेहरा ख़ूब-सूरत है उसे देखा तो जाना ये के दुनिया ख़ूब-सूरत है
Saqlain Mushtaque
3 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Saqlain Mushtaque.
Similar Moods
More moods that pair well with Saqlain Mushtaque's sher.







