ग़म-ए-हिज्र से मैं हूँ आशना मुझे आरज़ू-ए-विसाल है ये इलाज और ये मुआलिजा मेरे दर्द कि तो दवा नहीं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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कुछ तो मुश्ताक़ शब-ए-हिज्र में राहत होगी जाते-जाते कोई तस्वीर पुरानी दे दे
Saqlain Mushtaque
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ना-ख़ुदा डर नहीं दरिया की रवानी का हमें हर तलातुम से निकलने का हुनर जानते हैं
Saqlain Mushtaque
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हिज्र मुश्किल से भी मुश्किल न कहीं हो जाए तुम शब-ए-वस्ल कोई ऐसी नवाज़िश न करो
Saqlain Mushtaque
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आह से उन की हुकूमत न पलट जाए कहीं हुक्मराँ हो के फ़क़ीरों को सताया न करो
Saqlain Mushtaque
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आ जाओ किसी सम्त से दो पल के लिए ही बीमार को कुछ देर की राहत भी बहुत है
Saqlain Mushtaque
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