नज़र में ठहरी हुई है मस्ती दिलों में ख़्वाहिश नई नई है ज़मीं पे गिरते हैं चाँद तारे फ़लक की साज़िश नई नई है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये दुनिया चाहती है हर किसी से फ़ायदा अपना बिना मतलब किसी पर यूँ इनायत कौन करता है
Arman Habib
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तेरी क़समें तेरे वा'दे तेरी बाहें तेरी यादें सभी मिल कर बताते हैं तेरा किरदार झूठा है
Arman Habib
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ग़म मनाने मैं तिरे दर पे नहीं आऊँगा अपने अंदर ही कहीं चुपके से मर जाऊँगा
Arman Habib
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मस्जिद के पास जबकि मकाँ उस का है मगर मैं हूँ कि अब तलक भी नमाज़ी न बन सका
Arman Habib
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रख दिए होंठ होंठों पे तुम ने देख लो अब शुगर बढ़ गया है
Arman Habib
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