नज़रें तो वो बचाता रहा सपनो में फिर भी आता रहा
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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मेरे हालात क्यूँ न समझा वो मेरे जज़्बात क्यूँ न समझा वो मैं मुहब्बत नहीं दिखाता हूँ इतनी सी बात क्यूँ न समझा वो
Atif khan
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यार तुम भी कमाल करते हो फिर बुरा मेरा हाल करते हो वक़्त पर ख़ुद कभी नहीं मिलते और मुझ से मलाल करते हो
Atif khan
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पहले जैसे मिरे हालात से डरता हूँ मैं अब मुहब्बत की तो हर बात से डरता हूँ मैं
Atif khan
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लो अब याद आने लगा वो समा जब किसी ने कहा था मुझे सब पता है
Atif khan
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आज अंजान वो राहें थीं फैली जिन में कभी बाँहें थीं
Atif khan
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