paigham to un ka aaya hai tum shahr mein 'tishna' aa jao sahra hai pasandida hum ko hum shahr mein ja kar kya karte
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
489 likes
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
471 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
More from Zaheer-ul-Hasan Tishna
ज़िंदगी का हर वरक़ बा-शौक़ पढ़िए ये किताब इक रोज़ लौटानी भी तो है
0 likes
ज़ीस्त में मेरे उस ने अँधेरा किया और उस को सभी 'रौशनी' कहते थे
0 likes
ज़रा रख ले तू नाम उस का लबों पर ख़ुदा की इबादत में राहत मिलेगी
0 likes
तू ज़्यादा मत हो परेशान सब्र कर थोड़ा ख़ुदा की ज़ात पे हम को यक़ीन है बेहद
0 likes
तू इतनी ख़ूब-सूरत है कि हरदम तकता रहता हूँ तेरे आगे नहीं कुछ हैसियत इस चाँद की ख़ूबी
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Zaheer-ul-Hasan Tishna.
Similar Moods
More moods that pair well with Zaheer-ul-Hasan Tishna's sher.







