paiham mauj-e-imkani mein agla panw nae pani mein
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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ज़रा छुआ था कि बस पेड़ आ गिरा मुझ पर कहाँ ख़बर थी कि अंदर से खोखला है बहुत
Rajinder Manchanda Bani
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वो एक अक्स कि पल भर नज़र में ठहरा था तमाम उम्र का अब सिलसिला है मेरे लिए
Rajinder Manchanda Bani
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वो टूटते हुए रिश्तों का हुस्न-ए-आख़िर था कि चुप सी लग गई दोनों को बात करते हुए
Rajinder Manchanda Bani
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तू कोई ग़म है तो दिल में जगह बना अपनी तू इक सदा है तो एहसास की कमाँ से निकल
Rajinder Manchanda Bani
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फिर न गुंजाइश-ए-यक-सदमा भी हम तुम में रही टूटता सिलसिला दोनों पे अयाँ था कितना
Rajinder Manchanda Bani
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