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पहले तो इस हिज्र ने जम कर बारिश की फिर बारिश में मोर नचाया यादों ने

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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा

Javed Akhtar

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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे

Umair Najmi

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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी

Azm Shakri

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

Tehzeeb Hafi

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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है

Abrar Kashif

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वो मुझे ले गया गुलों के बीच और कहने लगा कि ऐसा बन

Karan Sahar

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तसव्वुर ने बनाया एक साया फिर असली धूप से उस ने बचाया तुझे इक ख़्वाब की मानिंद समझा तुझे दिन भर जिया शब भर सजाया

Karan Sahar

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उस की निगाह-ए-नाज़ में आने के वास्ते मेहनत के साथ-साथ मुक़द्दर भी चाहिए

Karan Sahar

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ज़ख़्म है दर्द है दवा भी है जैसे जंगल है रास्ता भी है यूँँ तो वादे हज़ार करता है और वो शख़्स भूलता भी है हम को हर सू नज़र भी रखनी है और तेरे पास बैठना भी है यूँँ भी आता नहीं मुझे रोना और मातम की इब्तिदा भी है चूमने हैं पसंद के बादल शाम होते ही लौटना भी है

Karan Sahar

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कौन देता है सदा हम को घने जंगल में तू है या तेरा तसव्वुर है भरे जंगल में कोई मंज़िल है न रास्ता है न साया कोई मैं अकेला ही भटकता हूँ मेरे जंगल में

Karan Sahar

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