फूल देते हो तुम फूल को फूल सा दिल भी रखते हो क्या ये तो माना कि आशिक़ हो तुम क़द्र भी मेरी करते हो क्या
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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किस तरह पूछूँ वो कहाँ है कैसा है अब माँ की बातें शोर लगती हैं उसे
Sanjay Bhat
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कहाँ ऐसे मरासिम थे कि कोई लौट के आता ख़िज़ाँ के फूल को ख़ूँ की नहीं अश्कों की हाजत थी
Sanjay Bhat
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ये रंगीन आँचल ये पुर नूर चेहरा खनक पायलों की ये चूड़ी का घेरा जहाँ तक भी देखो है ख़ुशबू तुम्हारी तुम्हारी चमक से है दिल में सवेरा
Sanjay Bhat
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ये किस तरह की मय-कशी है कौन सा इलाज है तुम्हें दवा भी चाहिए तो ज़हर के लिबास में
Sanjay Bhat
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तू न मायूस होना मुझे दे के ग़म ग़म रखे हैं कुछ और ख़ुद-कुशी के लिए
Sanjay Bhat
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