पूछे हैं वजह-ए-गिरिया-ए-ख़ूनी जो मुझ सेे लोग क्या देखते नहीं हैं सब उस बे-वफ़ा का रंग
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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फूल गुल शम्स-ओ-क़मर सारे ही थे पर हमें उन में तुम्हीं भाए बहुत
Meer Taqi Meer
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न रक्खो कान नज़्म-ए-शाइ'रान-ए-हाल पर इतने चलो टुक 'मीर' को सुनने कि मोती से पिरोता है
Meer Taqi Meer
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मत सहल हमें जानो फिरता है फ़लक बरसों तब ख़ाक के पर्दे से इंसान निकलते हैं
Meer Taqi Meer
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उम्र गुज़री दवाएँ करते 'मीर' दर्द-ए-दिल का हुआ न चारा हनूज़
Meer Taqi Meer
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इक़रार में कहाँ है इनकार की सी ख़ूबी होता है शौक़ ग़ालिब उस की नहीं नहीं पर
Meer Taqi Meer
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