प्रश्न रहता यही है जी से जी भूल पाएँगे तुम को जीते जी
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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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तुम्हारे बा'द ये दुख भी तो सहना पड़ रहा है किसी के साथ मजबूरी में रहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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सामने वो यूँँ मिरे डब्बा टिफ़िन का रखती थी जैसे थाली खाने की बीवी लगाकर देती है बाग के सब फूल मालन मुरझा ना जाएँ यूँ भी तू नज़र नईं डाले, बस पानी लगाकर देती है
Aarush Sarkaar
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पहले बेचारी आँखों के निखार उतरते होंगे तब जा कर इन आँखों से त्योहार उतरते होंगे
Aarush Sarkaar
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मत कहो मिरे हमदम ये कि राएगाँ हो तुम इक जहाँ के बंदे का, यार दो जहाँ हो तुम
Aarush Sarkaar
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लाने को तो चाँद सितारे लाएँगे जान लाने वाले पर हम इकलौते हैं तुझ पर अपना ईमान लाने वाले
Aarush Sarkaar
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लाख अदाएं हैं लाख की उस की और करोड़ों की है हँसी उस की
Aarush Sarkaar
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