प्रेम राधा प्रेम मोहन है प्रेम स्याही प्रेम दरपन है
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हाए वो इश्क़ छुपाने के ज़माने 'मोहन' याद आता है ग़लत नाम से नंबर रखना
Balmohan Pandey
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प्राण बिन देह जैसे अधुरी लगे कृष्ण आधा लगे संग राधा न हो
Vishnu Saxena
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सारे पेड़ क़लम में बना दूँ और समुंदर रख लूँ स्याही तब भी न लिख पाऊँगा मैं उस पे , ऐसी है मेरी माई
BR SUDHAKAR
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चढ़ चुका रंग जिस पर तेरे प्रेम का होली का रंग उस पर चढ़ेगा नहीं
Alankrat Srivastava
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कान्हा होंगे लोग वहाँ के राधा होंगी बालाएँ प्यार की बंसी बजती होगी हर समय हर ठाओं रे
Ghaus Siwani
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यार उस ने अब निशाना तय किया जाँ मगर पहले दिवाना तय किया वो सफ़र से लौट कर जो आ गया यार पहले ही ठिकाना तय किया
Arohi Tripathi
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हम मोहब्बत नहीं समझते हैं बात ये तुम ग़लत समझते हो
Arohi Tripathi
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मौत को जब क़रीब से देखे सारे मंज़र अजीब से देखे
Arohi Tripathi
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महीनों बा'द जब वापस से अपने घर गई थी मैं अधूरी बात को कहते हुए ही मर गई थी मैं
Arohi Tripathi
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धूप से छाँव की तरफ़ चलना शहर से गाँव की तरफ़ चलना
Arohi Tripathi
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