sherKuch Alfaaz

प्यार करने की हिम्मत नहीं उन के पास और हम सेे किनारा भी होता नहीं बात सीधे कही भी नहीं जा रही और कोई इशारा भी होता नहीं उस को उम्मीद है ऐश होगी बसर साथ में जब रहेगी मिरे वो मगर मुझ पे जितनी मुहब्बत बची है सखी इतने में तो गुज़ारा भी होता नहीं

More from Divyansh "Dard" Akbarabadi

हमारा प्यार यूँँ ही पाएमाल होता रहा हर इक सवाल के बदले सवाल होता रहा जहाँँ में जो भी है उस का लिखा हुआ है अगर तो क्या हमारा फ़क़त इस्तिमाल होता रहा

Divyansh "Dard" Akbarabadi

0 likes

क्यूँ मिरे फूल से चेहरे यूँँ है मुरझाया सा तुझ सा तो बाग़-ए-जहाँ में कोई दूजा भी नहीं

Divyansh "Dard" Akbarabadi

1 likes

तू आदतन चीज़ों को रखता था जगह पर इस लिए कमरे की सब चीज़ों को मैं भी दर-ब-दर करता रहा

Divyansh "Dard" Akbarabadi

1 likes

मिलने के बा'द हर कोई मसरूफ़ हो गया जब तक नहीं मिले थे सभी बे क़रार थे कोई सुख़नवरी थी न कोई हुनर था पास लेकिन हमारे हक़ में तमाम इश्तिहार थे

Divyansh "Dard" Akbarabadi

1 likes

तब मिरा प्यार उन्हें रास नहीं आया था अब झुलसते हैं मिरे यार की तस्वीरों से

Divyansh "Dard" Akbarabadi

0 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Divyansh "Dard" Akbarabadi.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Divyansh "Dard" Akbarabadi's sher.