रफ़्ता-रफ़्ता जाऊँगा मैं ज़ीस्त से तेरी जैसे मेरी दादी की बीनाई गई थी
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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वो मुझे पूछते हैं गाँव में क्या रक्खा है मैं उन्हें कहता हूँ सब मेरे बड़े रहते हैं
DEVANSH TIWARI
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उस के दर पर ही बिला शर्त खड़े रहते हैं जैसे परवाने हों जो लौ से अड़े रहते हैं उस का दिल दिल नहीं मयख़ाना हो जैसे यारों चार छह लोग जहाँ यूँँ ही पड़े रहते हैं
DEVANSH TIWARI
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एक परिंदे ने जबसे दो प्यारी बातें बोली हैं दिल में कितने दीप जले हैं आँखों में रंगोली है
DEVANSH TIWARI
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मुझ में बस एक ही ख़राबी है मैं ज़बाँ-ओ-दिमाग़ रखता हूँ
DEVANSH TIWARI
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घोर उदासी देखी है उन चेहरों ने जिन चेहरों को सदियों तक मुस्काना था दौड़ रहे थे आगे-पीछे जो साए तारीकी में उन्हें तो मुर्शिद जाना था
DEVANSH TIWARI
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