रगो में जोश भर दे जो तिरंगा नाम है उस का तफ़ाख़ुर सीने का जिस के है भारत उस को कहते है
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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यूँँ तो है दफ़्तर में काम बहुत फिर भी निकाल लेते वक़्त तसव्वुर का तेरे
Abha sethi
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ज़ुल्फ़ों में सजा मुझे लो अपनी तुम बना के गुल बन सदा-बहार मैं खिला रहूँगा साए में
Abha sethi
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टूट के बिखरूँ तो सुकूँ मेरा तेरी ही बाँहों का बिछोना हो
Abha sethi
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तल्ख़ी है क्यूँँ ये कैसी मनमानी है क्यूँँ रूठे हो मुझ सेे क्या ही ठानी है
Abha sethi
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वक़्त- बे-वक़्त यूँँ ही आया कर दिल है घबराता वादो से मेरा
Abha sethi
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