सारी नमी को सोख के सहरा को तर कर दूँ बादल बनूँ तो यूँँ बनूँ दरिया को तर कर दूँ
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तलब करें तो ये आँखें भी इन को दे दूँ मैं मगर ये लोग इन आँखों के ख़्वाब माँगते हैं
Abbas rizvi
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कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
Kumar Vishwas
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रख के हर चीज़ भूलने वाली ला तेरा दिल सँभाल कर रख दूँ
Kumar Vishwas
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मोहब्बत से मोहब्बत मिल गई जैसे कि सहरा में कली इक खिल गई जैसे न जाने कैसे तुम बिन जी रहा था मैं समझ लो हर घड़ी मुश्किल गई जैसे
Krishnakant Kabk
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ये रख रखाव कभी ख़त्म होने वाला नहीं बिछड़ते वक़्त भी तुझ को गुलाब दूँगा मैं
Khurram Afaq
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ज़िंदगी इस तरह कुछ अपनी बसर होती रही चाह फूलों की थी काँटों पर गुज़र होती रही
Tarun Bharadwaj
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वो तभी पाया गया है पास में जब हमें यूँँ बेख़ुदी होने लगी
Tarun Bharadwaj
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तेरी नज़रों का झुकना जबके बैचेनी बढ़ाता है तेरी नज़रों का तो उठना हमें निपटा ही डालेगा
Tarun Bharadwaj
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वो अपने वादे का यूँॅं एहतराम करता है बस एक जुमले में क़िस्सा तमाम करता है
Tarun Bharadwaj
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पढ़े-लिखे बालक तेरी क्या ज़िम्मेदारी है सामने भूखा बच्चा है और माँ दुखियारी है
Tarun Bharadwaj
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