वो अपने वादे का यूँॅं एहतराम करता है बस एक जुमले में क़िस्सा तमाम करता है
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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है
Zia Mazkoor
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आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं दिन में सौ बार याद करता हूँ पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं
Aadil Rasheed
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इश्क़ से अपने कुछ चुने लम्हें अनकहे और अनसुने लम्हें आओ मिल कर जियें दुबारा से सर्द रातों के गुनगुने लम्हें
Sandeep Thakur
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कोई चादर वफ़ा नहीं करती वक़्त जब खींच-तान करता है
Unknown
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जब भी उस की गली में भ्रमण होता है उस के द्वार पर आत्मसमर्पण होता है किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है
Azhar Iqbal
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ज़िंदगी मेरी सँवर जाती तो अच्छा होता तेरी बाहों में गुज़र जाती तो अच्छा होता तेरा दीदार हो ये लब पे दुआ थी कब से तू भी कुछ देर ठहर जाती तो अच्छा होता
Tarun Bharadwaj
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वो तभी पाया गया है पास में जब हमें यूँँ बेख़ुदी होने लगी
Tarun Bharadwaj
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ज़िंदगी इस तरह कुछ अपनी बसर होती रही चाह फूलों की थी काँटों पर गुज़र होती रही
Tarun Bharadwaj
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सारी नमी को सोख के सहरा को तर कर दूँ बादल बनूँ तो यूँँ बनूँ दरिया को तर कर दूँ
Tarun Bharadwaj
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सुनता नहीं ये दिल मेरी कोई भी बात अब मुझ सेे ख़फ़ा हुए हैं ये दिन-और-रात सब कह दे कि तेरी सोच में मैं इक ख़याल हूँ कह दे तू छोड़ती हूँ मैं भी तेरा साथ अब
Tarun Bharadwaj
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