saz-e-ulfat chhid raha hai aansuon ke saz par muskurae hum to un ko bad-gumani ho gai
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
489 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
471 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
More from Jigar Moradabadi
यही है ज़िंदगी तो ज़िंदगी से ख़ुद-कुशी अच्छी कि इंसाँ आलम-ए-इंसानियत पर बार हो जाए
Jigar Moradabadi
9 likes
कूचा-ए-इश्क़ में निकल आया जिस को ख़ाना-ख़राब होना था
Jigar Moradabadi
13 likes
दोनों हाथों से लूटती है हमें कितनी ज़ालिम है तेरी अँगड़ाई
Jigar Moradabadi
18 likes
हमीं जब न होंगे तो क्या रंग-ए-महफ़िल किसे देख कर आप शरमाइएगा
Jigar Moradabadi
18 likes
गरचे अहल-ए-शराब हैं हम लोग ये न समझो ख़राब हैं हम लोग
Jigar Moradabadi
26 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Jigar Moradabadi.
Similar Moods
More moods that pair well with Jigar Moradabadi's sher.







