सब मुक़द्दर का खेल होता है अपने हाथों में कुछ नहीं होता
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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वो ख़ुदा है या है ख़ुदा जैसा जिस के दम पर खड़े हुए हैं हम
shampa andaliib
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तुम्हें पाकर ही आया नूर रुख़ पे वगरना ख़ुश नहीं हूँ मैं अज़ल से
shampa andaliib
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तुम्हारा साथ जुगनू की तरह अब हमारी ज़िंदगी रौशन करेगा
shampa andaliib
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ता-उम्र मेरे सर पे रहा ग़म का आफ़्ताब लेकिन कभी हयात ने रुस्वा नहीं किया
shampa andaliib
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तीरगी से उजाले की सम्त आ गई जिस घड़ी हो गया आपसे राब्ता
shampa andaliib
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