सबूत-ए-वफ़ा है ये अहल-ए-ज़मीं की पहनकर कफ़न भी ज़मीं के रहेंगे
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सोचता हूँ कि यूँँ न हो इक दिन ये ज़मीं कोई आसमाँ निकले
Vikas Rana
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मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो आसमाँ लाए हो ले आओ ज़मीं पर रख दो
Rahat Indori
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जितनी बटनी थी बट चुकी ये ज़मीं अब तो बस आसमान बाक़ी है
Rajesh Reddy
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कैसे ये मान लें तू लकीरों में नहीं है हम ने भी कह दिया है तेरा हो के रहेंगे
Shadab Asghar
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अपनी ज़बाँ से कुछ न कहेंगे चुप ही रहेंगे आशिक़ लोग तुम से तो इतना हो सकता है पूछो हाल बेचारों का
Ibn E Insha
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तमाम रात एक शख़्स के लिए जला के छोड़ रक्खे थे सभी दिए
Yamir Ahsan
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वो मुझ को जब नज़रअंदाज़ करती है ये ख़ामोशी बहुत आवाज़ करती है
Yamir Ahsan
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हू-ब-हू तुझ को ग़ज़ल में यूँॅं उतारा मैं ने देखते रह गए तस्वीर बनाने वाले
Yamir Ahsan
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ले जाऊँ सफ़र ये सितारों से आगे मगर तुम बढ़ो तो इशारों से आगे
Yamir Ahsan
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पंखा दीवार और खिड़कियों पर नज़र जाती है रात यूँँ ही गुज़रनी थी यूँँ ही गुज़र जाती है इश्क़ ने कौन सी तार जाने कहाँ जोड़ दी दिल कभी भरने लग जाए तो आँख भर जाती है
Yamir Ahsan
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