सफ़र कैसे कटा उन रास्तों को कौन गिनता है तुम्हारे सर पे बीते हादसों को कौन गिनता है सभी रखते हैं गिन के उँगलियों पर कामयाबी को उठाई हैं जो तुम ने मुश्किलों को कौन गिनता है
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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किस ने दस्तक दी ये दिल पर कौन है आप तो अंदर हैं बाहर कौन है
Rahat Indori
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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ज़रा से शक पे हुआ ख़त्म राब्ता लेकिन ज़रा सा शक न हुआ ख़त्म दरमियाँ से मगर
Mohit Subran
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ज़रा सा चूक गया मैं तुझे समझने में वगरना ज़ीस्त तिरी धज्जियाँ उड़ाता मैं
Mohit Subran
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ये उदासी भरी इक रात भला कुछ भी नहीं हम ने वो दिन भी हैं काटे कि जो काटे न गए
Mohit Subran
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सख़्त थे जैसे भी थे वैसे ही मुमकिन चाहिए कुछ भी बोलें आप हम से हम को लेकिन चाहिए रखिए अपने 'अच्छे दिन' ये और सारे जुमले भी हम को तो वापस हमारे वो बुरे दिन चाहिए
Mohit Subran
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वही बातें उन्हें लगने लगी हैं शूल के जैसी वही बातें, जो उन को इब्तिदा में फूल लगती थीं
Mohit Subran
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