वही बातें उन्हें लगने लगी हैं शूल के जैसी वही बातें, जो उन को इब्तिदा में फूल लगती थीं
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ज़रूरत क्या तिजारत-गार को ख़ुद हाथ रँगने की ठिकाने कुछ लगाना हो अगर सरकार बैठी है
Mohit Subran
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ज़रा से शक पे हुआ ख़त्म राब्ता लेकिन ज़रा सा शक न हुआ ख़त्म दरमियाँ से मगर
Mohit Subran
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ज़रा सा चूक गया मैं तुझे समझने में वगरना ज़ीस्त तिरी धज्जियाँ उड़ाता मैं
Mohit Subran
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यूँँ पाँव पाँव चला उम्र भर मगर देखो चला जहाँ से था मैं लौट के वहीं पहुँचा नहीं ये बात नहीं तय सफ़र किया ही नहीं रहा सफ़र में ही फिर भी कहीं नहीं पहुँचा
Mohit Subran
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ये उदासी भरी इक रात भला कुछ भी नहीं हम ने वो दिन भी हैं काटे कि जो काटे न गए
Mohit Subran
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