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सियासतों ना क़लंदरों के ना माल-ओ-ज़र या सिंगार आगे झुकेगा सर अपना सिर्फ़ रोज़ी या दीद-ए-परवर-दिगार आगे

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इश्क़ अगर बढ़ता है तो फिर झगड़े भी तो बढ़ते हैं आमदनी जब बढ़ती है तो ख़र्चे भी तो बढ़ते हैं माना मंज़िल नहीं मिली है हम को लेकिन रोज़ाना एक क़दम उस की जानिब हम आगे भी तो बढ़ते हैं

Tanoj Dadhich

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किसी के साए को क़ैद करने का एक तरीक़ा बता रहा हूँ एक उस के आगे चराग़ रख दे, एक उस के पीछे चराग़ रख दे मैं दिल की बातों में आ गया और उठा के ले आया उस की पायल दिमाग़ देता रहा सदाएँ, चराग़ रख दे, चराग़ रख दे

Charagh Sharma

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ख़ाली पड़ा है और उदासी भरा है दिल सो लोग इस मकान से आगे निकल गए

Ankit Maurya

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दोस्त है वो तुम्हारी मुहब्बत नहीं हद से आगे क़दम मत बढ़ाया करो

Rakesh Mahadiuree

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आ ही गए हैं ख़्वाब तो फिर जाएँगे कहाँ आँखों से आगे उन की कोई रहगुज़र नहीं

Aalok Shrivastav

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