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ताजमहल फीका लगता था जब तक तू उस के आगे थी

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मिरी कश्ती भरे पानी में भी अब धूल खाती है वो सब को याद करती है मुझे ही भूल जाती है

ZafarAli Memon

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सर पटक के रो रहा हूँ मैं गुज़िश्ता रात से छोड़ जाने को कहा था उस ने मुझ सेे ख़्वाब में

ZafarAli Memon

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किसी का 'ऐब मत खोलो तुम अपने आप को देखो बुरा पापी नहीं होता तुम उस के पाप को देखो अगर बनना है तुम को एक बेहतर आदमी तो फिर कलाकारों को मत देखो तुम अपने बाप को देखो

ZafarAli Memon

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यूँँ पतंगों की तरह जो उड़ रहा है तू 'ज़फ़र' जब गिरेगा फ़र्श पे तब होश आएगा तुझे

ZafarAli Memon

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तुझे न मेरी कोई ख़बर थी मुझे न कोई तिरा पता था मैं शहर में ढूँढ़ता था जिस को वो गाँव में कब से लापता था जिधर से तू रोज़ जाया करती जो बाग़ से राब्ता था तेरा न ही कहीं पे थी तेरी ख़ुश्बू न ही कहीं पे अता-पता था

ZafarAli Memon

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