तारीख़ में कई जो हर हाल में खड़े थे सोचा कि लौट जाएँ पर देर तक लड़े थे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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उस की आँखें याद हैं मुझ को उस का चेहरा याद नहीं है
Vivek Vistar
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पिछला शे'र मुक़र्रर कर दो अगला मिसरा याद नहीं है
Vivek Vistar
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रोज़ जय श्रीराम या अल्लाहू अकबर पर लड़े क्यूँ सभी जय हिंद का नारा लगा सकते नहीं
Vivek Vistar
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यहाँ हम ने सँभाला होश है जबसे तभी से हो रहीं रफ़्तार की बातें
Vivek Vistar
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फितरतों से लगा है वो जाबिर हमें पर हमें तो मसीहा बताया गया
Vivek Vistar
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