तसल्ली हो अगर तिश्नालबों को तो बस दो चार बूँदें ही बहुत हैं
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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उदासी का सबब दो चार ग़म होते तो कह देता फ़ुलाँ को भूल बैठा हूँ फ़ुलाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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उस ने आगाज़-ए-पज़ीराई किया है ऐसे और ठहरने को नहीं करता है दिल अब मेरा
shampa andaliib
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उस को लफ़्ज़ों में बयाँ करना है मुश्किल आज दिल को जिस ख़ुशी ने छू लिया है
shampa andaliib
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उसी सूरज की मुझ पर रौशनी है जिसे कल साथ में देखा था हम ने
shampa andaliib
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तिरी आँखों के अंदर देखती हैं मिरी आँखें समुंदर देखती हैं यही आँखें जहाँ वालों को देखें यही आँखें कलंदर देखती हैं
shampa andaliib
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सब साफ़ दिख रहा है मुझे दूर तक अभी चेहरे पे तेरे नाम की हल्की सी धूप है
shampa andaliib
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