तुम्हें हरगिज़ ग़लत समझे न कोई रुको मैं बे-वफ़ाई कर रहा हूँ
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़ किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
Gulzar
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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सब इंतिज़ार में थे कब कोई ज़बान खुले फिर उस के होंठ खुले और सबके कान खुले
Umair Najmi
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मैं पहले झूठ पर हकलाया उस सेे फिर उस के बा'द माहिर हो गया था
Shadab Javed
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अगर तू ख़ुश है मेरी हार से तो मेरी हर जीत से नफ़रत है मुझ को
Shadab Javed
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तू परिंदा है किसी शाख़ को घर कर लेगा जो तेरे हिज्र का मारा है किधर जाएगा
Shadab Javed
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ख़बर मिली है स्टेशन पर तुम भी आने वाली हो रेल को पीछे छोड़ दीया है साँसों की रफ़्तारों ने
Shadab Javed
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हमें जिन की हिमायत चाहिए थी वही नज़रें चुरा कर जा रहे हैं
Shadab Javed
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