उबलते अश्क न रख रोक के बहा दे इन्हें कहीं ये अश्क न पलकें तिरी जला डालें
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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चाय पीते हैं कहीं बैठ के दोनों भाई जा चुकी है ना तो बस छोड़ चल आ जाने दे
Ali Zaryoun
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मुझ सेे मिलने ही आती है नुक्कड़ पर पानी पूरी केवल एक बहाना है
Divy Kamaldhwaj
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बात ऐसी भी भला आप में क्या रक्खी है इक दिवाने ने ज़मीं सर पे उठा रक्खी है इत्तिफ़ाक़न कहीं मिल जाए तो कहना उस सेे तेरे शाइ'र ने बड़ी धूम मचा रक्खी है
Ismail Raaz
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यही अंजाम अक्सर हम ने देखा है मोहब्बत का कहीं राधा तरसती है कहीं कान्हा तरसता है
Virendra Khare Akela
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वो ख़ुदा क्यूँ न हो प इक ख़्वाहिश हर किसी की अधूरी रहती है
Mohit Subran
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वक़्त ने छोड़ा न इक हाथ भी इन हाथों में ज़िन्दगी तुझ को गुज़ारूँ तो गुज़ारूँ कैसे
Mohit Subran
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वो हादसा जो नहीं बीता है अभी मुझ पर उसी के ख़ौफ़ से दिल मेरा ख़ौफ़ खाता है
Mohit Subran
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ज़रा सा चूक गया मैं तुझे समझने में वगरना ज़ीस्त तिरी धज्जियाँ उड़ाता मैं
Mohit Subran
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ये एक सच कि मुसलसल हमारे हिस्से में वही तो ज़िन्दगी आई जो हम ने चाही नहीं
Mohit Subran
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