उदासी रुख़ पे फिर छाने लगी है तुम्हारी याद फिर आने लगी है
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इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है
Zia Mazkoor
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हम पे एहसान हैं उदासी के मुस्कुराएँ तो शर्म आती है
Varun Anand
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अव्वल तो मैं नाराज़ नहीं होता हूँ लेकिन हो जाऊँ तो फिर मुझ सेा बुरा होता नहीं है
Ali Zaryoun
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वो इक नदी जो कभी तेज़-तेज़ बहती थी वो आज रेत के मैदान सी बिछी हुई है मैं इक दरख़्त था 'अशरफ़' किसी ज़माने में खिज़ां के कहरस अब ठूँठ ही बची हुई है
Ashraf Ali
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रोज़ खोता हूँ ख़यालों में तुम्हारी जानाँ रोज़ धुँधली हुई तस्वीर उभर आती है
Ashraf Ali
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सारी दुनिया को अजनबी कर के ख़ुश हूँ ख़ल्वत से दोस्ती कर के
Ashraf Ali
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है नाज़ मुझ को आप मेरे राब्ते में हैं मेरे भी हिस्से आ गए कुछ शानदार लोग ज़िंदादिली का ज़िक्र कहीं हो रहा हो तो सुनते ही याद आते हैं बचपन के यार लोग
Ashraf Ali
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आह यूँँ टूटा भरम, सब कुछ ख़तम उन्स, कीना, साद, ग़म, सब कुछ ख़तम
Ashraf Ali
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