उन को देखा तो मेरी माँ की मुझे याद आई वही झुर्री वही आँखें वही मरकत से चरण
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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वादों से मुकर जाना तो फ़ितरत है तुम्हारी कुछ और नया खेल दिखाओ तो बने बात
Nityanand Vajpayee
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मिलन मुमकिन बनाने की जुगत कुछ तो बताएँ आप अकेले किस क़दर भीगूँ मैं सावन भर चले आते
Nityanand Vajpayee
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ये रिश्ता प्यार का है ख़ैर तोड़ेगा नहीं कोई तुम्हारा साथ ऐसा है कि छोड़ेगा नहीं कोई
Nityanand Vajpayee
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ख़ुदा-रा कौन सा ग़म टूट पड़ता गर चले आते बिला-शक आस्तीं में तुम लिए नश्तर चले आते
Nityanand Vajpayee
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सिर्फ़ होली ही नहीं ईद पे भी रंग उड़ेल हिंदवी साख़ में बढ़वार यूँँ नाबाद रहे रंग ऐसा कि तमाम उम्र नहीं छूटे फिर रिश्ता ऐसा कि क़यामत में भी आबाद रहे
Nityanand Vajpayee
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