उस से बढ़ कर किया मिलेगा और इनआम-ए-जुनूँ अब तो वो भी कह रहे हैं अपना दीवाना मुझे
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
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कुछ इस के सँवर जाने की तदबीर नहीं है दुनिया है तिरी ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर नहीं है
Hafeez Banarasi
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चले चलिए कि चलना ही दलील-ए-कामरानी है जो थक कर बैठ जाते हैं वो मंज़िल पा नहीं सकते
Hafeez Banarasi
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हर हक़ीक़त है एक हुस्न 'हफ़ीज़' और हर हुस्न इक हक़ीक़त है
Hafeez Banarasi
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चले चलिए कि चलना ही दलील-ए-कामरानी है जो थक कर बैठ जाते हैं वो मंज़िल पा नहीं सकते
Hafeez Banarasi
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समझ के आग लगाना हमारे घर में तुम हमारे घर के बराबर तुम्हारा भी घर है
Hafeez Banarasi
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