उस को यार न कुछ भाता है जिस के हिस्से ग़म आता है आँखों को कोई समझाए रातों को सोया जाता है
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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ये फ़िल्मों में ही सब को प्यार मिल जाता है आख़िर में मगर सचमुच में इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं होता चलो माना कि मेरा दिल मेरे महबूब का घर है पर उस के पीछे उस के घर में क्या-क्या कुछ नहीं होता
Tehzeeb Hafi
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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे अपनी दुनिया बुरी लग गई जिस को आबाद करते हुए मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई
Tehzeeb Hafi
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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ये ख़ुदा तू तो ये जानता है कितने तरसे हैं इक शख़्स को हम
Jitendra "jeet"
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ये अमीरी इश्क़ पर भारी हुई जब से सो लगा है जिस्म का बाज़ार कमरे में
Jitendra "jeet"
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वो मैं था जो उस की हर हाँ में शामिल नइँ था बस इस कारण ही तो मैं उस के क़ाबिल नइँ था उस दिल के दफ़्तर में मिल तो जाता काम मुझे हाँ पास मेरे रिश्वत में देने को दिल नइँ था
Jitendra "jeet"
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हम महफ़िल में ज़ख़्म दिखाने आए हैं टूटे दिल का हाल सुनाने आए हैं
Jitendra "jeet"
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मैं तो माँ के क़दमों में हूँ मुझ को जन्नत से क्या लेना
Jitendra "jeet"
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