उसूल अब मोहब्बत के बदल गए सभी गुनाह बे-वफ़ाई अब नहीं रही यहाँ
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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ज़मीं से जब जुदा तू हो नहीं सकता यहाँ पर फिर ख़ुदा तू हो नहीं सकता
Manoj Devdutt
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तुम कभी मेरे लिए तो साबिक़ा होगी नहीं फिर यहाँ कोई तुम्हारे बा'द आएगा नहीं
Manoj Devdutt
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सितम्बर को सितमगर लिखते हैं यही तो हम सुख़न-वर लिखते हैं
Manoj Devdutt
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सूरज बिना ताप के ही अधूरा है बच्चा बिना बाप के ही अधूरा है अब एक से तो बना है नहीं ये हम ये हम बिना आप के ही अधूरा है
Manoj Devdutt
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उस ने जब से हम दोनों को जुदा किया है फिर कब मैं ने उस पत्थर को ख़ुदा किया है उस को नावों की सवारी अच्छी लगती थी बस उस के ख़ातिर ख़ुद को नाख़ुदा किया है
Manoj Devdutt
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