उस से कहना की धुआँ देखने लाएक़ होगा आग पहने हुए मैं जाऊँगा पानी की तरफ़
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प्यास अगर मेरी बुझा दे तो मैं जानू वरना तू समुंदर है तो होगा मेरे किस काम का है
Rahat Indori
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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कोई अटका हुआ है पल शायद वक़्त में पड़ गया है बल शायद दिल अगर है तो दर्द भी होगा इस का कोई नहीं है हल शायद
Gulzar
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ये तुम सब मिल के जो कुछ कह रहे हो मैं कह सकता हूँ पर कहना नहीं है हमारा शे'र भी सुनने न आएँ हमारा दुख जिन्हें सहना नहीं है
Ali Zaryoun
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सहर की आस लगाए हुए हैं वो कि जिन्हें कमान-ए-शब से चले तीर की ख़बर भी नहीं
Abhishek shukla
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ये आग वाग का दरिया तो खेल था हम को जो सच कहें तो बड़ा इम्तिहान आँसू हैं
Abhishek shukla
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ये इम्तियाज़ ज़रूरी है अब इबादत में वही दुआ जो नज़र कर रही है लब भी करें
Abhishek shukla
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ये जो दुनिया है इसे इतनी इजाज़त कब है हम पे अपनी ही किसी बात का ग़ुस्सा उतरा
Abhishek shukla
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मैं अपने चारों तरफ़ हूँ और इस तरह का हुजूम अजीब किस्म की तन्हाई साथ लाता है
Abhishek shukla
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