wahshi raqs chamakte khanjar surkh alaw jangal jangal kante-dar qabile phul
sherKuch Alfaaz
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मुमकिन ही नहीं जीतना कोशिश से कोई दिल कुछ बस में नहीं बाल बनाने के अलावा
Shariq Kaifi
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तुझे कुछ याद भी है क्या मिरा उस रात में आना छतों से कूदकर के फिर भरी बरसात में आना कई मंज़र बने ख़ंजर चुभे मेरी निगाहों में मुझे मिलने को पर तेरा किसी के साथ में आना
nakul kumar
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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झुके तो जन्नत उठे तो ख़ंजर करेंगी हम को तबाह आँखें
Parul Singh "Noor"
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तुम्हारा नाम जैसे एक मीठे पान का बीड़ा ज़बाँ पे रख लिया है रूह मेरी सुर्ख़ है तब से
Umesh Maurya
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