वहाँ तक रौशनी क़ाइम रहेगी ये नस्ल-ए-नौ जहाँ तक जा रही है
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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अगर तू मुझ सेे शर्माती रहेगी मुहब्बत हाथ से जाती रहेगी
Tehzeeb Hafi
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रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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तारीकियों को आग लगे और दिया जले ये रात बैन करती रहे और दिया जले उस की ज़बाँ में इतना असर है कि निस्फ़ शब वो रौशनी की बात करे और दिया जले
Tehzeeb Hafi
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यूँँ तो दुनिया में बेकल रहे हैं हौसले से मगर चल रहे हैं
Sohil Barelvi
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ये समुंदर भी ख़ाली कर दूँगा एक क़तरा तो पी लिया मैं ने
Sohil Barelvi
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ये महफ़िल है मियाँ ज़िंदा-दिलों की सुनो यारों यहाँ हम बोलते हैं
Sohil Barelvi
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तुम्हारी बे-रूख़ी से लग रहा है क्यूँँ बहुत तकलीफ़ होगी एक दिन मुझ को
Sohil Barelvi
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याद-ए-माज़ी के सिवा कुछ नहीं रहता है यहाँ देखते देखते हर साल गुज़र जाता है
Sohil Barelvi
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