वक़्त के हाथ-पैर बाँध सकूँ ऐसी ज़ंजीर हो तो ले आओ
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अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं
Jawwad Sheikh
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का यही तो वक़्त है सूरज तिरे निकलने का
Shahryar
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कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई कि लोग रोने लगे तालियाँ बजाते हुए
Rehman Faris
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वक़्त अच्छा भी आएगा 'नासिर' ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी
Nasir Kazmi
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यूँँ न सब को सलाम करने से काम बनता है काम करने से
Saarthi Baidyanath
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ज़िन्दगी क़र्ज़ की तेरी साँसें सूद के साथ मैं चुका दूँगा
Saarthi Baidyanath
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ज़ख़्म भरने से एक डर भी है इश्क़ की लज़्ज़तें न खो दूँ मैं
Saarthi Baidyanath
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ये धड़कन तेज़ अब तक चल रही है गले मिल कर जो तुम सेे बढ़ गई थी
Saarthi Baidyanath
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ये ग़लत सोच ही दुनिया की बदलनी है मुझे साहिलों पर कोई तूफ़ान नहीं होता है
Saarthi Baidyanath
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