sherKuch Alfaaz

वो अय्याम-ए-ग़म-ए-माज़ी के लम्हे मिरे आँसू तिरा आँचल रहा है

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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है

Bashir Badr

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न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं तिरा इंतिज़ार बहुत किया तिरा इंतिज़ार भी अब नहीं तुझे क्या ख़बर मह-ओ-साल ने हमें कैसे ज़ख़्म दिए यहाँ तिरी यादगार थी इक ख़लिश तिरी यादगार भी अब नहीं

Jaun Elia

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इश्क़ को पूछता नहीं कोई हुस्न का एहतिराम होता है

Asrar Ul Haq Majaz

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तो क्या उस को मैं होंठों से बजाऊँ तिरे दर पे जो घंटी लग गई है चराग़ उस ने मिरे लौटा दिए हैं अब उस के घर में बिजली लग गई है

Fahmi Badayuni

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तुम्हें पता है मिरे हाथ की लकीरों में तुम्हारे नाम के सारे हुरूफ़ बनते हैं

Fareeha Naqvi

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