वो अय्याम-ए-ग़म-ए-माज़ी के लम्हे मिरे आँसू तिरा आँचल रहा है
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घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे
Unknown
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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है
Bashir Badr
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यही बहुत है मिरे ग़म में तुम शरीक हुए मैं हॅंस पड़ूँगा अगर तुम ने अब दिलासा दिया
Imran Aami
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ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा
Munawwar Rana
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मैं अँधेरों से बचा लाया था अपने आप को मेरा दुख ये है मिरे पीछे उजाले पड़ गए
Rahat Indori
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ज़ुल्म जो भी किया गया हम पर सामने सब ख़ुदा के रखना है
Meem Maroof Ashraf
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इतने अच्छे नहीं थे हम लेकिन तेरे सब आशिक़ों से बेहतर थे
Meem Maroof Ashraf
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मैं चाहता था बस कि मिरे साथ तू रहे क्या तुझ से और जान मिरी चाहता था मैं
Meem Maroof Ashraf
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कितनी मुश्किल से तुझ को पाया था कितनी आसानी से गँवा डाला
Meem Maroof Ashraf
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वो मेरे हाल से वाक़िफ़ है फिर भी मुस्कुराता है मैं कैसे मान लूँ उस को मिरे हालात का ग़म है
Meem Maroof Ashraf
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