लो वक़्त बदला अब कहाँ शैतान से डरता है मन इंसान के अंदर छिपे हैवान से डरता है मन
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पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँँ करें हम
Jaun Elia
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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दिल में और दुनिया में अब नहीं मिलेंगे हम वक़्त के हमेशा में अब नहीं मिलेंगे हम
Jaun Elia
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तुम बड़े अच्छे वक़्त पर आए आज इक ज़ख़्म की ज़रूरत थी
Zubair Ali Tabish
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ज़िंदगी जी नहीं जाती ऐसे मौत इक रोज़ बोली गले लग
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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ज़ख़्म नासूर है और दवा भी वही हर्फ़ ढाई मगर ज़िंदगी है मेरी
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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नज़र के सामने है खोजती जिस को नज़र तेरी ज़रा ख़ुद को जगाओ और बोलो देखने को सच
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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प्रेम ने थामा है जब से ज़िंदगी खिल सी गई है शब्द भी सब मौन तब से ध्यान भी ख़ुद घट रहा है
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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जुर्म गुमनाम होकर भी बदनाम है जाने कैसी सज़ा मिल रही है उसे
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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