याद में तेरी नहीं जो कभी सोया है मैं हूँ अपने ख़्वाबों में तुझे जिस ने पिरोया है मैं हूँ
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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ज़ुल्म करते हैं हम पे लोग अभी इतना क्यूँ जलते हम से लोग अभी हम ने तो हक़ किसी का खाया नहीं तंज़ कैसे भी देते लोग अभी
Parvez Shaikh
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ज़ुल्म ऐसा न मेरे साथ करें ज़िस्म में रूह भी न बाक़ी रहे
Parvez Shaikh
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मिली ना किसी से मुहब्बत कभी भी पड़ी ना किसी की ज़रूरत कभी भी
Parvez Shaikh
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ज़िंदगी चल मिरा क़ुसूर बता हिज्र क्यूँ काटना पड़ा मुझ को
Parvez Shaikh
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क्या कहूँ कुछ कहा भी नहीं जाता है बिन तिरे अब रहा भी नहीं जाता है ज़ख़्म ऐसा के मरहम कोई भी नहीं मुझ से ये सब सहा भी नहीं जाता है
Parvez Shaikh
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