यही वो दिन था कि तुझ को गले लगाया था यही वो दिन था कि ख़ुदस बिछड़ गए थे हम
Related Sher
इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
112 likes
कोई हसीन बदन जिन की दस्तरस में नहीं यही कहेंगे कि कुछ फ़ाएदा हवस में नहीं
Umair Najmi
109 likes
बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
751 likes
जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते हैं कई पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई?
Umair Najmi
109 likes
घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
294 likes
More from Meem Maroof Ashraf
यूँँ भी हक़ मुझ पे तेरा बनता है मुझ से जो उम्र में बड़ी है तू
Meem Maroof Ashraf
0 likes
न जाने भेस में वो किस के डस ले वो नागिन इच्छाधारी हो गई है
Meem Maroof Ashraf
0 likes
मुश्किल हुआ जाता है बहुत रह नहीं पाते अब दर्द-ए-जुदाई को पिया सह नहीं पाते हम साथ तसव्वुर में तिरे क्या नहीं करते हाँ वो भी सभी कुछ जो कभी कह नहीं पाते
Meem Maroof Ashraf
0 likes
मैं चाहता था बस कि मिरे साथ तू रहे क्या तुझ से और जान मिरी चाहता था मैं
Meem Maroof Ashraf
0 likes
जब भी चूमा है तेरे होंटों को जिस्म से इन को जुदा जाना है
Meem Maroof Ashraf
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Meem Maroof Ashraf.
Similar Moods
More moods that pair well with Meem Maroof Ashraf's sher.







