ये एक दिन फ़रेब हुआ मुझ को जाने क्यूँँ शायद हो इक फ़रेब ही संसार सारा ये
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ज़िम्मेदारी जीने ही देती नहीं है ज़िंदगी भर जीनी पड़ती हैं बहुत सी ज़िंदगी इक ज़िंदगी में
Abhay Aadiv
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नदी के शांत तट पर बैठ जाऊँ और वो रावी की तरह बहती चली जाए पता है आज तुम को क्या हुआ 'आदिव' वो बोले और फिर कहती चली जाए
Abhay Aadiv
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यार वक़्त ख़ुद का लाने में वक़्त लगता है बीज को शजर बन जाने में वक़्त लगता है
Abhay Aadiv
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टूट कर बिखरने नईं दिया उस ने मुझे जोड़कर कुछ ऐसे ही रखा उस ने मुझे
Abhay Aadiv
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पानी से क़तरे क़तरों से पानी जैसी ये सोच वैसा मआ'नी
Abhay Aadiv
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