ये हुनर रब ने मेरी ज़ात में रक्खा हुआ है अच्छे अच्छो को भी औक़ात में रक्खा हुआ है
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं सब के दिल से उतर गया हूँ मैं
Jaun Elia
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उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है मिल जाए तो बात वगैरा करती है बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है रोने में आसानी पैदा करती है
Tehzeeb Hafi
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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"जो तू नहीं थी तो और भी थे, जो तू ना होगी तो और होंगे" किसी के दिल को जला के कहते हो, "मेरी जाँ! ये मुहावरा है"
Fareeha Naqvi
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दे रहे हैं लोग मेरे दिल पे दस्तक बार बार दिल मगर ये कह रहा है सिर्फ़ तू और सिर्फ़ तू
Fareeha Naqvi
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ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा थम न जाए कहीं जुनूँ आ जा इस से पहले कि मैं अज़िय्यत में अपनी आँखों को नोच लूँ आ जा
Fareeha Naqvi
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पूछने पर वो ये कह देगा, यूँँ ही शे'र हुए वैसे यूँँ ही कोई हरकत नहीं की जाती है
Fareeha Naqvi
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तुम्हें पता है मिरे हाथ की लकीरों में तुम्हारे नाम के सारे हुरूफ़ बनते हैं
Fareeha Naqvi
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