ये जुदाई तो एक रात की है फ़िक्र मुझ को मेरी हयात की है लोग मतलब से याद करते हैं 'सैफ़' ये रस्म क़ायनात की है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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हम घर से तो चले थे किसी और काम को फिर यूँँ हुआ कि उन की गली याद आ गई
Saif Dehlvi
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मैं तन्हा सर-ए-राह खड़ा सोच रहा हूँ तन्हाई मिटाने के लिए जाऊँ कहाँ पर वो बे-वफ़ा तो लौट के आने से रहा अब तू ही बता ऐ दिल तुझे बहलाऊँ कहाँ पर
Saif Dehlvi
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वहाँ गंदुम ने कहीं का न रखा यहाँ पे तुम ने कहीं का न रखा
Saif Dehlvi
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भूलने वाले तिरे सर की क़सम शाम के बा'द याद कर कर के तुझे रोते हैं हम शाम के बा'द
Saif Dehlvi
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वक़्त-ए-जुदाई सर को झुकाए उन का मुझ से ये कहना देखो कल शादी है मेरी और तुम को भी आना है चाँद सितारों सो जाओ तुम जल्दी सूरज को भेजो सुब्ह सवेरे मुझ को मेरे यार से मिलने जाना है
Saif Dehlvi
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