वक़्त-ए-जुदाई सर को झुकाए उन का मुझ से ये कहना देखो कल शादी है मेरी और तुम को भी आना है चाँद सितारों सो जाओ तुम जल्दी सूरज को भेजो सुब्ह सवेरे मुझ को मेरे यार से मिलने जाना है
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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तुम इन्तिज़ार तो कर दोगे ख़त्म आ के मगर न कर सकोगे अदा मेरे इन्तिज़ार का हक़
Saif Dehlvi
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ये जुदाई तो एक रात की है फ़िक्र मुझ को मेरी हयात की है लोग मतलब से याद करते हैं 'सैफ़' ये रस्म क़ायनात की है
Saif Dehlvi
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अहमक़ नहीं जो ज़ाया' करूँँ चार दिन भी मैं काटूँगा आरज़ू में न ही इन्तिज़ार में
Saif Dehlvi
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मज़बूत रखे अपना इरादा उसे कहना यूँँ तोड़ के जाते नहीं वा'दा उसे कहना क़िस्मत में जुदाई है जुदा होना पड़ेगा इस बारे में सोचे नहीं ज़्यादा उसे कहना
Saif Dehlvi
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ता-उम्र तिरे पास ये बैठे न रहेंगे नादाँ तू बुज़ुर्गों को ज़रा वक़्त दिया कर
Saif Dehlvi
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