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ये ख़ुशी सिगरटें समझती हैं छोड़ता सोग आसमाँ पर मैं

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मना करते उसे थे जो वही वो कर दिखाती थी मैं सूरज को उगाता था वो रातें खींच लाती थी अभी भी तुम में ज़िंदा है वही बेबाक़ सी लड़की ज़माने के उसूलों पे जो खुल के मुस्कुराती थी

Shan Sharma

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मुझे अच्छा नहीं लगता ये कहना हमनवाई में हुआ पर है बहुत नुक़सान तुझ सेे आशनाई में दिया है वक़्त जितना इक तिरी इस चाह को मैं ने ख़ुदा मिल जाता है इतने दिनों की पारसाई में

Shan Sharma

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लिखी थी जो तुम्हें बेनाम सी वो चिट्ठियाँ हैं कहीं थोड़ी शिकायत है कहीं कुछ अर्ज़ियाँ हैं तुम्हारे बा'द दिल में याद ठहरी और घर में जले फ़िल्टर रखे हैं और थोड़ी तीलियाँ हैं

Shan Sharma

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इश्क़ पनपेगा तो फिर अश्कों की होंगी बारिशें पेड़ लगने पर कभी सूखी ज़मीं रहती नहीं

Shan Sharma

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निभाओगी जो तुम वा'दा करोगी वफ़ा का या कहीं सौदा करोगी जिसे तुम ढूँढती रहती हो मुझ में मिला वो ग़ैर में तो क्या करोगी

Shan Sharma

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