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यूँँ चाहतों के इस दौर में अकेले नहीं वो न जाने कितने आए हैं दिल दुखाने के लिए

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ज़माने भर से तो की दिल-लगी हम ने मोहब्बत का सलीक़ा भी नहीं आया

Naviii dar b dar

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यूँँ तो ज़माने में अच्छी भी तर्बियत रखते हैं कुछ रौशन हो के भी अंधेरे की अहमियत रखते हैं कुछ हैं जानते क़द्र इंसा की दिल से होती यहाँ पर बस इस लिए अब भी दिल में इंसानियत रखते हैं कुछ

Naviii dar b dar

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ज़माने भर ने तो बस दिए हैं ता'ने हम को किसी ने भी मन में झाॅंक कर नहीं देखा यूँँ

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यूँँ तो ज़माने में अच्छी भी-तर्बियत रखते हैं कुछ रौशन हो के जो अंधेरे की अहमियत रखते हैं कुछ वो जानते क़द्र इंसा की-दिल से होती यहाँ पर बस इस लिए अब भी दिल में-इंसानियत रखते हैं कुछ

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यूँँ ज़िन्दगी के वास्ते भी कुछ नहीं किया ये सोचता है दिल तो उम्र के पड़ाव पर

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