यूँँ तो कोई ख़ुशी नहीं लेकिन आदतन मुस्कुराता रहता हूँ
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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भूखे थे और भूखे ही रह जाएँगे मर जाएँगे हाथ नहीं फैलाएँगे
Gulshan
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मेरे दस्त-ए-तमन्ना पर तुम्हारे हाथ का होना बड़े हासिद बनाएगा बहुत से दिल जलाएगा
Gulshan
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मुरझा गया गुलाब तो अफ़सोस ये हुआ नाहक़ जुदा किया उसे शाख़ों से तोड़ कर
Gulshan
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छोड़ रहे हो अच्छा है तुम तो ये भी कर सकते हो मैं तो जिस से मिल जाता हूँ साथ निभाने लगता हूँ
Gulshan
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सफ़र को बीच में हम छोड़कर वापस चले आते इशारा लौट आने का किसी ने तो किया होता
Gulshan
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