यूसुफ़ न बन सका कभी तेरी निगाह में लेकिन तुझे तो मैं ने ज़ुलेख़ा बना दिया
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ताल में पंछी पनघट गागर चौपालें कितना सुंदर गाँव का मंज़र होता है टूटा फूटा गिरा पड़ा कुछ तंग सही अपना घर तो अपना ही घर होता है
SALIM RAZA REWA
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समझ रहा था जिसे अपना वाक़ई अब तक वो कर रहा था मेरे दिल से दिल-लगी अब तक हसीन जाल मोहब्बत का फेंकने वाले समझ चुका हूँ हर इक चाल मैं तेरी अब तक
SALIM RAZA REWA
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रिज़्क़ में उस के बरकत हरदम होती है जिस के घर में आते हैं मेहमान सदा
SALIM RAZA REWA
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राह पर सदाक़त की गर चला नहीं होता सच हमेशा कहने का हौसला नहीं होता कोशिशों से देता है रास्ता समुंदर भी हौसला रहे क़ाएम फिर तो क्या नहीं होता
SALIM RAZA REWA
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शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है
SALIM RAZA REWA
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