zamane bhar ke gham ya ek tera gham ye gham hoga to kitne gham na honge your sorrow or a world of pain if this be there none will remain
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
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मैं ने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए मुझ में
Ammar Iqbal
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कोई शरीक-ए-ग़म नहीं अब तिरी याद के बग़ैर कोई अनीस-ए-दिल नहीं अब तिरे नाम के सिवा
Hafeez Hoshiarpuri
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कहीं ये तर्क-ए-मोहब्बत की इब्तिदा तो नहीं वो मुझ को याद कभी इस क़दर नहीं आए
Hafeez Hoshiarpuri
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कोई मौक़ा ज़िंदगी का आख़िरी मौक़ा नहीं इस क़दर ताजील क्यूँ रफ़-ए-कुदूरत के लिए
Hafeez Hoshiarpuri
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दोस्ती आम है लेकिन ऐ दोस्त दोस्त मिलता है बड़ी मुश्किल से
Hafeez Hoshiarpuri
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ख़ुद अपनी गुम-शुदगी से जिन्हें शिकायत है तू ही बता उन्हें तेरा निशाँ कहाँ से मिले
Hafeez Hoshiarpuri
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