यही है इबादत यही दीन-ओ-ईमाँ कि काम आए दुनिया में इंसाँ के इंसाँ
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Altaf Hussain Hali
@altaf-hussain-hali
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
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हम ने हर अदना को आ'ला कर दिया ख़ाकसारी अपनी काम आई बहुत
sherKuch Alfaaz
हम ने अव्वल से पढ़ी है ये किताब आख़िर तक हम से पूछे कोई होती है मोहब्बत कैसी
sherKuch Alfaaz
हम जिस पे मर रहे हैं वो है बात ही कुछ और आलम में तुझ से लाख सही तू मगर कहाँ
sherKuch Alfaaz
वो उम्मीद क्या जिस की हो इंतिहा वो वा'दा नहीं जो वफ़ा हो गया
sherKuch Alfaaz
राज़ी हैं हम कि दोस्त से हो दुश्मनी मगर दुश्मन को हम से दोस्त बनाया न जाएगा
sherKuch Alfaaz
होती नहीं क़ुबूल दुआ तर्क-ए-इश्क़ की दिल चाहता न हो तो ज़बाँ में असर कहाँ
sherKuch Alfaaz
है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूब-तर कहाँ अब ठहरती है देखिए जा कर नज़र कहाँ
sherKuch Alfaaz
उस ने अच्छा ही किया हाल न पूछा दिल का भड़क उठता तो ये शो'ला न दबाया जाता
sherKuch Alfaaz
फ़राग़त से दुनिया में हर दम न बैठो अगर चाहते हो फ़राग़त ज़ियादा
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